प्रयागराज युवा खेल केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना चाहता है और इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तथा प्रतिभा कार्यक्रम दोनों पर जोर दे रहा है।
लेकिन किसी भी शहर का खेल इकोसिस्टम केवल मैदानों से नहीं बनता। उसे गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, नियमित प्रतियोगिता और संस्थागत निरंतरता चाहिए।
इसीलिए देखने वाली बात फॉलो-थ्रू है। इमारतें अहम हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या शहर निरंतरता बना पाएगा।