लखनऊ की नई स्कूल अपग्रेड योजना इसलिए अलग दिखती है क्योंकि यह केवल दृश्य बदलाव पर नहीं टिकी है। प्रस्ताव में क्लासरूम तैयारी, शिक्षक सहयोग और रोज़मर्रा की सुविधाओं की विश्वसनीयता को ज्यादा महत्व दिया गया है।

यही सही दृष्टिकोण है। माता-पिता और छात्र सुधार को प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं, टाइमटेबल, सफाई और पढ़ाई की गुणवत्ता से महसूस करते हैं।

अगर शिक्षा सुधार भरोसेमंद दिखाना है तो सामान्य स्कूल दिवस को बड़े पैमाने पर बेहतर बनाना होगा।

Related Social

What the conversation looks like around this story

More Depth

Blogs, explainers, and slower reads tied to this story

कानपुर का पानी संकट सिर्फ सप्लाई नहीं, प्लानिंग अनुशासन की कहानी क्यों है
नागरिक मुद्दे कानपुर
कानपुर का पानी संकट सिर्फ सप्लाई नहीं, प्लानिंग अनुशासन की कहानी क्यों है

कानपुर में जल दबाव का सवाल जितना सप्लाई का है, उतना ही लीक, समन्वय और डिलीवरी टाइमिंग का भी है।

Raghav Mehrotra एक दिन पहले
वाराणसी की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था ध्यान को कमाई में बदलना सीख रही है, बिना गहराई खोए
मनोरंजन वाराणसी
वाराणसी की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था ध्यान को कमाई में बदलना सीख रही है, बिना गहराई खोए

शहर की अगली चुनौती है कि प्रामाणिकता को बचाते हुए पर्यटन और पैमाने दोनों को संभाला जाए।

Garvit Bajpai एक दिन पहले
Previous story क्रिकेट भारत की अटेंशन इकॉनमी पर अब भी हावी, लेकिन शहर-आधारित फैनडम और परतदार हुआ Next story फैक्ट चेक: देशभर में फ्यूल नियम बदलने का वायरल दावा भ्रामक