कानपुर की औद्योगिक पहचान अब केवल अतीत का संदर्भ नहीं रही, बल्कि प्रतिस्पर्धा और आधुनिक उत्पादन की नई चर्चा बन रही है। कुछ सेक्टरों में भर्ती की वास्तविक मांग दिखाई दे रही है।
चुनौती फिटमेंट की है। उद्योगों को ऐसे तकनीशियन और सुपरवाइजर चाहिए जो बदले हुए उत्पादन माहौल में काम कर सकें, जबकि नौकरी तलाशने वालों को अभी भी बिखरी जानकारी और कमजोर प्लेसमेंट सहायता मिलती है।
यही वह जगह है जहां नीति, प्रशिक्षण संस्थान और उपयोगी पत्रकारिता फर्क ला सकते हैं।